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देश को गोल्ड मेडल जिताने वाला कपिल बना सिस्टम की अवहेलना का शिकार

reporter 2019-10-03 207
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  • kissaago
    • परिवार के साथ गोल्ड मेडलिस्ट कपिल परमार।

    सीहोर। इग्लैंड में हालहीं संपन्न हुई कामनवेल्थ पैरा जूडो चैम्पियनशिप में सीहोर के रहने वाले कपिल परमार ने अफ्रीका के खिलाडी को हराकर देश को गोल्ड मेडल दिलाकर। सीहोर जिले के साथ ही पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। कामनवेल्थ पैराम जूडो चैम्पियनशिप में 60 किग्रा  वर्ग, दृष्टिबाधित पुरुष केटेगरी में यह पहला गोल्ड मेडल है। विदेशी धरती पर देश और प्रदेश का  परचम लहराने वाले खिलाडी कपिल परमार को सरकारी मशीनरी की अवहेलना का शिकार होना पड़ रहा है। 
                    प्रदेश सरकार खेलों को बढावा देने का दावा करती है और खिलाडियों से उम्मीद जताई जाती है कि वह मेडल लाकर और बेहतर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाए। लेकिन देश खिलाडियों को एक और बेहतर सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जाती और मेडल लाने पर उन्हें सरकारी तंत्र की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। सीहोर के मुरली क्षेत्र में रहने वाले टैक्सी ड्राईवर रामसिंह परमार के 19 वर्षीय बेटे कपिल परमार हालहीं में इग्लैंड में संपन्न हुए कामनवेल्थ पैरा जूडो चैम्पियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल दिलाया। देश का नाम रोशन करने वाले इस खिलाडी को सरकार और प्रशासन द्वारा अनदेखा कर दिया गया। गोल्ड मेडलिस्ट कपिल परमार ने बातचीत के दौरान बताया कि अन्य खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने पर सरकार ईमान व अन्य आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराती है लेकिन अभी तक कोई भी जिम्मेदार उन तक नहीं पहुंचा। खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा भी उनकी अनदेखी की गई। अभी तक ना तो कोई प्रशस्ती पत्र और सरकारी मद्द की गई है, देश को गोल्ड दिलाने वाले इस खिलाडी के प्रोत्साहन के लिए अभी तक स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन भी आगे नहीं आया है। 

    पैरा जूडो ओलंपिक 2020 के लिए बहा रहे पसीना 
    आगामी वर्ष 2020 में जापान के टोक्यो शहर में पैरा जूडो ओलंपिक आयोजित होने जा रहा है। इस अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कपिल जमकर पसीना बहा रहे हैं। वह भोपाल लालघाटी स्थित पिरविलिस पैरा एडं ब्राईट फांउडडेशन ओलंपिक एडं पैराओलंपित में तैयारी 

    करते हैं। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 8 से 10 घंटा प्रैक्टिस कर रहे हैं। डाईट पर प्रतिमाह 30 से 50 हजार रुपए का खर्च आते है। लेकिन इस आयोजन में भाग लेने के लिए उनका सरकारी मद्द नहीं मिल रही है। कपिल के पिता टैक्सी ड्राईवर हैं जिन्होंने पारिवारिक खर्चों में कटौती कर एकत्रित जमा पूंजी कपिल के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा दी है और अब उनकी जिला प्रशासन और  मप्र सरकार से अपेक्षा है कि गोल्ड मेडल 
    जीतकर आए खिलाडी की मद्द सरकार को करना चाहिए। उनकी इच्छा है कि उनके बेटे को सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद मिले। जिससे कपिल आगे भी प्रदेश और देश का नाम अंतराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सके। .

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