Breaking News

न्यू इंडिया जिसमे सब अच्छा है, सब चंगा सी.......

reporter 2019-10-16 79
  • share on whatsapp Buffer
  • kissaago
    • सोशल मीडिया, साभार

    बीते माह हमारे प्रधानमंत्री अपने अमरीकी में थे, कार्यक्रम था हाउ डी मोडी। वह अपने अमरीकी दोस्तो को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे कि भारत में सब अच्छा है। सब चंगा सी। कई भाषाओं में उन्होंने यह शब्द कहे। कितनी मजे की बात है न सात समुंदर पार से भारत में सब चंगा सी।। एनआरआई मित्र जो भारत को कूड़े का ढेर समझ इस देश को रुखसत कर गए। उन्हें मोदी की नजर से भारत में अच्छा लग रहा है।
    नोटबंदी के बाद लाखों बेरोजगार हुए और जीएसटी से उद्योग चौपट होय पड़े हैं, लघु और मंझोले उद्योग तो नोटबंदी के बाद पनप ही नही पाए। रियल इस्टेट सेक्टर बर्बाद ऐसा गिरा की उठ नही पाया और अब डूबती अर्थव्यवस्था का असर बड़े उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है जहाँ कमर्चारियों की छटनी शुरू हो गई है। लेकिन भारत में सब चंगा सी।।
    21वी सदी जहाँ देश अंतरिक्ष में सफलता के झंडे गाड़ रहे तब दूसरी और धर्म के नाम पर भीड़ बेगुनाहों को हत्या कर रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि लीचिंग पश्चिमी शब्द है भारत में ऐसा नही होता। बनाया हुआ शब्द है।
    अब इसे वध या फिर संहार कहे, क्या कहे?
    फिर भी सब चंगा सी।
    मॉब लीचिंग के विरोध में कुछ जागरूक लोगों ने पीएम को पत्र लिखा तो उन्हीं पर केस दर्ज करने के आदेश एक अदालत ने सुना दिए।
    क्या अब विचार रखने की आज़ादी भी नही?
    BSNL बन्द होने की कगार पर है। बैंक बन्द हो रहे हैं या मर्ज किये जा रहे हैं उपभोक्ताओं का करोड़ो रूपये फंसे हैं। मोदी सरकार महारत्न कम्पनी BPCL के शेयर बेचकर इसे निजी हाँथो में देने को तैयार है। क्योकि देश का खजाना खाली है।
    सरकारी संस्थानों को तेजी से निजी हाँथो में सौपा जा रहा है। फिर भी सब चंगा सी।।
    भारत में जब सब चंगा है तो एक बच्ची को मंदिर की दान पेटी से रुपए क्यो चोरी करने पड़े। जिसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया पर किसी ने जानना भी नही चाहा की मासूम को चोरी क्यो करनी पड़ी। घटना मध्यप्रदेश के सागर जिले के एक गांव की है। जहाँ मासूम बच्ची को अपने छोटे भाइयों की भूख मिटाने भगवान के घर चोरी करनी पड़ी।
    सरकारी तंत्र जहाँ न्याय पाने गरीब चप्पल घिस घिस कर पागल हो जाता है। फरियादी , मुलजिम बन जाता है।
    भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र, सुनने बोलने और लिखने में कितना अच्छा लगता है।
    कहते हैं डेमोक्रेसी में जनता राजा है, दिल बहलाने के लिए खयाल अच्छा है ग़ालिब।
    जब आप दफ्तरों में देखते है तो यह मुगालता भी दूर हो जाएगा।
    नेता और नोकरशाहो के सामने जनता अपना ही हक पाने भिखारी की तरह खड़ी रहती है।

    यहाँ मध्यप्रदेश में मंगलवार का दिन जनसुनवाई का दिन होता है अब तो सभी जानते हैं कि इस भ्रष्ट तंत्र में किसकी सुनवाई होती है। हर मंगलवार को यह तमाशा देखते हैं। नोकरशाही के इस जाल को तोड़ना आसान नही, रिश्वत अब शिष्टाचार बन गया है और उंगली उठाने वाला नकारात्मक या फिर देशद्रोही।
    अनाज उगाने वाला किसान भूखा, कर्ज के बोझ से आत्महत्या करता है फिर भी सब चंगा।।
    बाकलम कपिल सूर्यवंशी


    .

    Similar Post You May Like