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भारतीय संविधान की आत्मा पर चोट है नागरिकता संशोधन बिल

reporter 2019-12-13 127
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  • kissaago

    अनेकों रंग, ढेरों संस्कृतिया, विविध लोग, अलग-अलग खान-पान, भाती-भाती की बोलियां। अनेकों धर्म, अनेकों जातियां, भिन्न भिन्न रंगों के लोग, अलग-अलग कद-कठियां, सबका अपना अपना पहनावा, खानपान की आदतें भी जुदा।
    भिन्न-भिन्न प्रजाति के सुंदर फूलों का गुलदस्ता है अपना देश भारत। इस विशाल भूमि पर सभी को आश्रय मिला चाहे वह किसी भी धर्म, पंथ या सम्प्रदाय का हो। विविधता ही इसकी पहचान है, जो इसे अलग बनाती है। धर्मनिरपेक्षता संविधान की आत्मा है। एक ऐसा लोकतंत्र जहाँ सभी को समानता का अधिकार मिला है। जहाँ धर्म के आधार पर किसी से भेदभाव नही होगा। यही बात हमारे संविधान के मूल भाव में निहित है।
    भारतीय संविधान की प्रस्तावना/उद्देशिका भी यही कहती हैं।
    छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी
    नए दौर में लिखेंगे हम मिलकर नई कहानी
    हम हिदुस्तानी। यह गीत 1960 में आई हम हिदुस्तानी फ़िल्म का है। नायक सुनील दत्त और आवाज मुकेश की है।
    वाकई में इस देश को यदि नई कहानी लिखना है तो मिलकर ही लिखना पड़ेगी। कल की बातें छोड़ना ही पड़ेगी। जब देश सने सने तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है तो कुछ ताकतें अपनी मनमानी गैरजरूरी नीतियों से इसे गर्त में धकेलने में लगे हैं। इस विज्ञानिक युग में बात होना चाहिए कि सस्ती और आधुनिक शिक्षा हाशिये पर बैठे लोगों तक को मिले ऐसे में बात कट्टरता और अंधविश्वास को बढ़ाने की हो रही है। धीरे-धीरे शिक्षा को गरीब की पहुंच से दूर किया जा रहा है। सरकारी संस्थानों को बंद कर प्रायवेट हाँथो में सौंपने की तैयारी है।
    सरकारी अस्पताल तो हैं परंतु इनमें बेहतर इलाज नही होता।
    समान शिक्षा, समान स्वास्थ्य, भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, महिला अपराध, जातिवाद, बाल मजदूर, मजदूरों के अधिकारों को लेकर इस देश में क्यो बात नही होती।
    बुधवार 11 दिसंबर को राज्यसभा में विवादित नागरिक संशोधन बिल पास हो गया।
    और ये बिल क्या कहता है, भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई भारत की नागरिकता ले सकते हैं। उसके लिए कुछ नियम और शर्ते हैं।
    मुस्लिम को छोड़ दिया गया है। बिल संविधान की मूल भावना, उसकी आत्मा को कुचलने जैसा है जिसमें धर्म के आधार पर नागरिकता की बात रखी गई है। संविधान किसी में भेद नही करता परन्तु सत्ता में बैठे लोग करते हैं।
    जिससे सत्ताधारी दल का एजेंडा साफ जाहिर होता है। आगामी लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपना हिन्दू कार्ड चल दिया है। नागरिक संशोधन बिल और राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर भाजपा हिन्दू धुर्वीकरण के सपने देख रही है। देश में मुस्लिम को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की मानसिकता के लक्षण दिख रहे हैं।
    NRC यानी राष्ट्रीय नागरिक पंजी भाजपा इसे पूरे देश में लागू करने की बात कहती रही है। असम में एनआरसी में हजारों करोड़ खर्च हुए। और इस रजिस्टर से 19 लाख गैर मुस्लिम बाहर हुए।
    आज असम सुलग रहा है। छात्र और आमजन सड़कों पर है जिन्हें खतरा है संस्कृति खात्मे का, आजीविका। प्रदर्शन में गुरुवार को 3 लोगों की मौत हो गई।
    समाचार मिल रहे हैं कि असम सहित पूर्वोत्तर की अनेकों जगह पर इंटरनेट सेवा बन्द कर दी गई है। जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिक संशोधन बिल को लेकर राज्यसभा बोल रहे थे कि आज का दिन बड़ा ही ऐतिहासिक है।
    तो एक बड़ा ही ऐतिहासिक दिन नोटबंदी का ही था जिसे देश काले अध्याय की तरह देखेगा। करोडों खर्च और बेतहाशा परेशानी, 100 से ज्यादा मौतें और मिला क्या
    डूबती अर्थव्यवस्था।
    इसे एक व्यक्ति की सनक ही कह सकते हैं। नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था रसातल में धकेल दिया। सिटीजन अमेंडमेंट बिल देश का नया विभाजन है, जहां एक धर्म विशेष के प्रति नफरत और बंटबारे की साजिश जाहिर होती है।
    ये गाँधी, अंबेडकर और भगतसिंह के सपनों का भारत नही।
    -बाकलम क़िस्सागो-
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    सत्ता आलोचना करने वालो को पाकिस्तान का हिमायती बात देती है, जनता भी इसमें शामिल हो जाती है। लोकतंत्र में आलोचना जरूरी है। नफरत और बंटबारे की राजनीति को जनता को समझना चाहिए।

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