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एवीबीपी नेता नही बनाती, नेतृत्व का विश्वविद्यालय है

reporter 2018-07-09 458
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  • kissaago


    छात्र नेता निखिल कुईया की कलम से-
    सीहोर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर छात्र नेता निखिल कुईया ने अपने अनुभव और संगठन को लेकर अपने विचार व्यक्त किये कुछ इस प्रकार हैं---
    9 जुलाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की स्थापना 1948 लेकिन पंजीयन 9 जुलाई 1949 को हुआ था इसे परिषद राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाता है,क्यो संगठन विद्यार्थियों के हितों की बात करता है। एक छोटे से ग्रुप से पंजीयन हुआ ये छात्र संगठन आज पूरे भारत में तेज़ी से बढ़ता हुआ विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन बन गया है, पिछले 8 साल में काम करते हुए ABVP से मैंने सब कुछ सीखा है, एक परिवार की तरह काम करना, खुद से बड़ों से सीखना, छोटों को सिखाना, यही संस्कार धीरे धीरे हमको इतने आगे ले गए की दुनिया भीड़ में भी हम विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता अपनी अलग पहचान बना लेते हैं, हम नेता नही है लेकिन नेतृत्व देने के मामले में हम दुनिया से लोहा मनवा सकते है, एबीवींपी नेता नही बनाती लेकिन नेतृत्व का विश्वविद्यालय है, जिसमे आप वो सब सीख जाते हैं जो आपको भीड़ से अलग दिखाता है, इसका राष्ट्रीय अधिवेशन एक तरह के लघु भारत का दृश्य होता है, जहाँ पूरे भारत की संस्कृति एक साथ दिखाई देती है, पूरे भारत में मेरी निःस्वार्थ संबंधों को गति यही से मिली, सभी अनजाने थे लेकिन सभी अपने हैं, वो रिश्ते बने जो शायद मरते दम तक साथ रहेंगे, एबीवीपी का अभ्यास वर्ग एक तरह का ट्रेंनिग कैंप जिसने हमको विषम परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए नेतृत्व करना सिखाया, वो हर एक सत्र जो क्लास रूम की तरह होता है, वो हर एक राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस जो हमारे साथ में सगे भाई या बहन की तरह रहते हैं , वो हर एक पूर्ण कालिक जो हमारा ध्यान रखते हैं, हमारे पालक की तरह होते हैं, हर एक प्राध्यापक जिसका राजनीती से कोई लेना देना नही लेकिन सिर्फ अच्छा नेतृत्व समाज को मिले ये सोच कर अपने परिवार को छोड़ कर हमारे साथ मेहनत कर हमारा लगातार मार्गदर्शन करते हैं। मुझे अच्छे से याद है मैं काम में इतना मस्त रहता था की ये भी भूल जाता था की शाम के 6 बज गए और मैंने कुछ भी नही खाया, सभी साथी कार्यकर्ता किसी गरीब जरूरतमंद छात्र की फीस भरने के लिए अपनी पॉकेट मनी से उनको मदद करते हैं। कारण सिर्फ और सिर्फ एक की हम सिर्फ एबीवीपी के लिए नही अपने देश के लिए भी काम कर रहे होते हैं, एबीवींपी एक ऐसा संगठन है जहा पोस्टर बेनर होर्डिंग्स का कोई स्थान नही है, हमारा काम ही हमारी पहचान बन जाती है, दुनिया की भीड़ में भी हम एबीवींपी के कार्यकर्ता अलग ही दिखाई देते है।संगठन ने वो सब हमको दिया है जो प्रमाण पत्र के रूप में तो नही दिखेगा लेकिन जहां दुनिया प्रमाण मांगेगी तो दुनिया खुद ही देख लेगी, हम विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता हैं और हमेशा रहेंगें। संगठन हमारी आत्मा है और हम इसका शरीर मरते दम तक रहेंगे।
    राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस की हार्दिक शुभकामनाये।

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