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तंग नालिया बनी परेशानी का सबब!ढाई इंच में यह हाल तो,बादल फटने पर क्या होगा...जनाब?

reporter 2018-07-17 1041
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  • kissaago

    - बारिश में शहर के हालातों पर वरिष्ठ पत्रकार अमित कुईया की टिप्पणी
    --- सीहोर। 2015 के बाद शहर के ड्रेनेज सिस्टम ने शहर को बारिश के समय कई बार तंग किया है। इसके पीछे बड़ा कारण नालियों के पुराने स्ट्रेक्चर के साथ छेडख़ानी है। दरअसल,वर्ष 2015 में प्रशासनिक स्तर पर शहर के कई क्षेत्रों में नालियों का स्वरूप बदल दिया गया। नाली निर्माण में जमकर लापरवाही बरती गई,इनके ढाल बेतुके कर दिए गए और कई जगह यह छोटी भी हो गई हैं। अचानक जब दवाब से पानी आता है तो यह नालियों से बाहर सड़को पर भर जाता है। नालियों के स्वरूप को बिगाडऩे में रही सही कसर अमृत योजना के दौरान भी हुई। निर्माता कंपनी ने सीवरेज कार्य के दौरान इन नालियों में मोटे मोटे पाइप इन नालियों के सहारे फैला दिए है। शहर में तत्कालीन कलेक्टर कवीन्द्र कियावत के समय जब अतिक्रमण मुहिम शुरू हुई थी । इस दौरान ढ़ालनुमा नालियों को तोड़कर इनका पुनर्निर्माण किया गया। उस समय जानकारों ने आशंका जताई थी कि भविष्य में यह शहर के ड्रेनेज सिस्टम को बिगड़ेगी। उस समय जानकारों की आशंका वर्तमान में बिल्कुल सही साबित हो रही है। बताया जाता है कि शहर के भौगोलिक दृष्टि से शहर की नालिया ब्रिटिश काल मे बहुत ही तकनीकी तरीके से बनाई गई थी और बारिश का यह पानी इन नालियों के सहारे शहर के अलग अलग नालो में समुचित तरीके से निकास होता था।
    सोमवार को दो घंटे की बारिश ने जानकारों की इस आशंका पर एक बार फिर मुहर लगा दी। शहर में दो घंटे में ढाई इंच बारिश मानो तबाही साथ लाई। शहर की बस्तिया,कालोनिया ओर सड़को पर पानी भरा गया। इस दृश्य ने एक बात साबित कर दी है कि यदि संभवत अचानक बादल फटने से आत्याधिक मात्रा में बारिश हो गई ,तो शहर में बड़ी तबाही से इनकार नही किया जा सकता है। इस दिशा में अब जिम्मेदारों को सोचना होगा। इसके लिए शहर की नालियों के स्ट्रेक्चर में सुधार की बड़ी आवश्यकता है । शहर में 48 करोड़ की राशि खर्च कर भले ही सीवरेज सिस्टम सुधारने की बात की जा रही हो,लेकिन जब तक शहर की सड़कों का ड्रेनेज सिस्टम नही सुधारा गया तो यह करोडो रुपए के प्रयास भी बारिश में धुल जाएंगे और शहर का भला नही होने वाला जनाब?

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