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भुजरियों में दिखे संस्कृति के रंग, गले मिलकर दी शुभकामनाएं

reporter 2018-08-27 324
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  • kissaago

    सीहोर। आधुनिकता की इस दौड में परंपराएं कहीं गुम सी होती जा रही हैं परन्तु नगर के ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को संजोए रखा है।
    सोमवार को परंपरागत रूप से भुजरिया का चल समारोह निकालकर एक दूसरे को भुजरिया देकर छोटो ने बड़ों का आशीर्वाद लिया साथ ही गले लगकर भुजरिया पर्व की बधाईयां दी। वहीं इस मौके पर इस दिन श्रावणी गीतों के साथ घेरा गम्मत करते हुए डंडे बजाते हुए लोग मस्ती में दिखाई दिए।
    परांपरा अनुसार सोमवार को नगर के अनेक क्षेत्रो से चौराहों पर एकत्रित होकर भुजरियां रखकर उनकी विधि विधान से पूजन की। तत्पश्चात भुजरियों को सिर पर रखकर महिलाएं नदी के तटों की गीते गाते हुए पहुंचकर भुजरियों का विसर्जन कर भुजरियों को तोड़ा गया। तत्पश्चात भुजरियों का आदान प्रदान कर एक दूसरे को भुजरियां दी गई। इस मौके पर बुजुर्ग व युवाओं ने घेरा ग मत करते हुए डंडे को बजाते हुए मौज मस्ती में डूबे दिखाई दिए। इस अवसर पर अनेक जगहों पर मेले जैसा नजारा नजर आया। जहां बच्चों के खिलौने, गुब्बारे, मनिहारी, चाट पकोड़ी बेचने वालों की दुकानो व ठेलो पर भीड़ नजर आई।
    सीवन नदी पर पहुंचकर हुआ समापन-- सोमवार को नगर के विभिन्न क्षेत्रों से भुजरियों का चल समारोह निकाला गया जो सीवन के तट पर पहुंचकर समाप्त हुआ। सीवन नदी पहुंचकर महिलाओं ने भुजरियां को तोड़ा गया। इसके बाद भुजरियों का आदान प्रदान किया गया। छोटे ने अपने से बड़ों को भुजरियां देकर आशीर्वाद लिया। वहीं लोगों ने एक दूसरे को भुजरियां देकर गले मिलकर भुजरियां पर्व की बधाई दी गई।
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