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सीएम शिवराज के जिले में अफसरों की संवेदनहीनता से प्रवासी श्रमिकों की फजीहत

reporter 2020-05-05 240
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  • kissaago
    • सैकडाखेडी बायपास पर खडे प्रवासी मजदूर।

    सीहोर। केन्द्र व राज्य सरकारों के तमाम दावों के बीच लॉक डाउन के 41 दिन बीत जाने के बाद भी प्रवासी मजदूर पैदल चलने को मजबूर हैं। सैकड़ों की संख्या में रोजाना प्रवासी मजदूर जिले से पैदल निकल रहे हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों के बाद भी जिले के असफर इन मजदूरों के लिए भोजन,पानी और आवागमन के साधन उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं। लापरवाही इस कधर है कि पैदल मजदूरों का जत्था जिले निकल जाता है और अफसर उनकी सुध तक नहीं लेते। गुजरात से पैदल चले ऐसे ही सैकड़ों मजदूरों का जत्था सोमवार को सीहोर से निकला

    जिनको प्रशासन द्वारा कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह मजदूर जबलपुर, कटनी, सीधी, उमरिया, उप्र, झारखंड के रहने वाले थे जो नो दिन पहले सूरत गुजरात से चले थे। सैकडाखेडी बायपास पर खडे मजदूर अनिल यादव ने बताया कि सूरत में कपड़ा मिल में काम करते थे लॉक डाउन में फैक्ट्री बंद हो गई और हमें मालिक ने भगा दिया, कई दिनों से पैदल चल रहे हैं। गुजरात और मप्र के कई जिलों से हम पैदल चले लेकिन हमें कहीं भी आवागमन का साधन मुहैया नहीं कराया गया। समाजसेवी लोग भोजन पैकेट दे देते हैं तो खा लेते हैं।

    अफसर नहीं उठाते फोन, समाजसेवी बने सहारा
    ज्ञात हो कि मप्र गृह मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को एक आदेश निकालकर सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया गया था कि अन्य राज्य व मप्र के विभिन्न जिलों से अपने घरों के लिए जाने वाले पैदल यात्रा कर रहे मजदूरों के लिए जिला प्रशासन द्वारा भोजन, पानी और स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही इन नागरिकों वाहन से उनके गंतव्य स्थान की और रवाना किया जाएगा। लेकिन देखने में यह आ रहा है जिला प्रशासन द्वारा पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। जिला प्रशासन की अव्यवस्था और कुप्रबंधन के चलते लॉक डाउन के 41 दिन बाद भी मजदूरों को हजारों किमी पैदल चलना पड़ रहा है। जिले से गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों को समाजसेवी संस्थाएं ही भोजन करा रही हैं। जिनके सदस्यों का कहना है कि जब हम इन मजदूरों को भोजन देते हैं तो अधिकारियों को भी सूचित कर देते हैं लेकिन इनसे मिलने कोई अधिकारी नहीं आता।

    पुलिस और प्रशासन में समंवय की कमी
    सीएम शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के बीच भारी समंवय की कमी देखने को मिल रही है जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। एक आरक्षक ने बताया कि इंदौर-भोपाल राजमार्ग पर हम रोजाना गश्त करते हैं सैकड़ों की संख्या में मजदूर यहां से पैदल निकलते हैं इस बात की सूचना हम प्रशासनिक अफसरों तक पहुंचाते हैं लेकिन हमारी कोई नहीं सुनता। हाईवे से गुजरने वाले ट्रक व अन्य वाहनों में हम मजदूरों को बैठा देते हैं। समाजसेवी संस्थाओं को फोन लगाकर इन्हें भोजन
    उपलब्ध करा देते हैं।

    इस मामले में कोविड 19 जिला प्रभारी जिला पंचायत सीईओ अरूण कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि मजदूरों को आवागमन की व्यवस्था की गई है। जिसका जिम्मा जिला परिवहन अधिकारी को दिया गया है।
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