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लॉक डाउन में वनोपज से रोजगार- 20 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को बटेंगा 5 करोड

reporter 2020-05-30 161
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  • kissaago
    • तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान निरीक्षण करते अधिकारी।

    सीहोर। वनों का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब हमारे महानगर एक और रोजगार संकट से जूझ रहे हैं तो वहीं दूसरी और
    इस लॉक डाउन में वन उपज के माध्यम से दूरस्थ्य आदिवासी अंचलों में लोगों को रोजगार मिल रहा है।
    तेंदूपत्ता और महुआ का संग्रहण ग्रामीणों के लिए आय के स्त्रौत साबित हुए हैं। जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य समाप्त हो चुका है और 20 हजार संग्राहकों को 5 करोड रूपए की राशि वितरित की जाएगी।
    साथ ही संग्राहकों के खाते हैं 1.99 करोड रूपए का बोनस भी डाला जाऐगा। ज्ञात हो कि जिले के बुधनी, नसरूल्लागंज, रेहटी क्षेत्र में तेंदूपत्ता और महुआ जैसे लघुवन उपज पाए जाती है जो आदिवासियों की आजीविका का बडा साधन है।
    चर्चा के दौरान डीएफओ रमेश गवाना ने बताया कि तेंदूपत्ता संघ के माध्यम से यह कार्य किया जाता है सीहोर जिले में 21 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हुआ है। संग्रहण कार्य 20 से 27 मई तक किया गया।
    बताया कि संग्रहण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया साथ ही संग्राहकों को मास्क और सेटेसाईजर का भी वितरण किया गया। जिले के बुधनी, नसरूल्लागंज,रेहटी, बकतरा क्षेत्र में 20 हजार संग्राहकों ने संग्रहण का काम किया है जिन्हें 5.25 करोड रूपए की नगद राशि बांटना शुरू हो चुका है इसके अलावा वर्ष 2019 में 51 परिवारों को 30 लाख रूपए तेंदूपत्ता संग्रहक कल्याण योजना एवं 67 विद्यार्थियों को 6.63 लाख रूपए एकलव्य शिक्षा योजना के

    तहत प्रदान किए गए हैं। श्री गनावा ने कहा कि वर्ष 2020 में 1.99
    करोड रूपए का बोनस भी संग्राहकों के खातों में डाला जाएगा।


    लॉक डाउन में महुआ ने दिया रोजगार
    8.23 लाख का भुगतान
    क्षेत्र में महुआ काफी मात्रा में होता है। लॉक डाउन में अवधि में भी महुआ बीनकर ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हुआ।
    वनमंडल अधिकारी सीहोर रमेश गनावा ने बताया कि वन विभाग ने 235 क्विटंल महुआ 3500 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर 8.23 लाख रूपए नगद भुगतान किया।
    विभाग द्वारा महुआ खरीदने के फलस्वरूप व्यापारियों ने 4 हजार से लेकर 4500 रूपए प्रति क्विंटल से महुआ खरीदा। जिसके चलते महुआ बीनने वालों को लाभ हुआ।
    कोरोना महामारी में भी वनउपज से मिला रोजगार
    लॉक डाउन के दौरान जब शहर रोजगार संकट से जूझ रहे हैं तो ऐसे में वनविभाग ने लघुवनोपज के माध्यम से दूरस्थ्य अंचलों में रहने वाले आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया।
    डीएफओ श्री गनावा ने कहा कि हमें वनों से सदा लाभ भी मिलेगा है, यह रोजगार के अच्छे साधन हैं हमें वनों की रक्षा करने चाहिए। ज्यादों से ज्यादा पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
    कहा कि कई समुदाय ऐसे हैं जो वनों पर आधारित हैं वनउपज ही उनकी आजीविका के साधन हैं पारंपरिक वनों को बचा कर ऐसे समुदायों की आय बढा सकते हैं। .

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