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आखिर इलेक्शन में क्यों हो गए हम्माल बेरोजगार ......पढे पूरी खबर

reporter 2018-11-24 443
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  • kissaago
    • लंबे अवकाश के चलते फुरसत में बैठे कृषि उपज मंडी हम्माल।

    सीहोर। लोकतंत्र के महापर्व मतदान में एक और जहां चुनावी शोर, उत्साह और हल्ला गुल्ला है तो वहीं दूसरी और मतदान के कारण ही कई परिवारों में मायूसी भी छाई हुई है। राजनीतिक प्रत्याशी इस महासमर में विजय पाने के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहा रहे हैं साथ ही जिला प्रशासन भी मतदान जागरुकता के प्रचार-प्रसार में जमकर पैसे बहा रहा है। तो दूसरी और कृषि उपज मंडी में हम्माल इस चुनावी माहौल में रोजगार के लिए मोहताज हो गए हैं। दरअसल मतदान के चलते कृषि उपज मंडी कर्मचारियों की ड्यूटी पोलिंग बूथों पर लगाई गई है। जिसके चलते 23 से 28 नबंवर तक एक सप्ताह के लिए कृषि उपज मंडी में अवकाश घोषित किया गया है। ऐसे में मंडी के भरोसे जीवन यापन करने वाले हम्माल और तुलावटियों के सामने बडा आर्थिक संकट खडा हो गया है।
    दरअसल 23 नवंबर को गुरु नानक जयंति, शनिवार को बैंक अवकाश, रविवार और सोमवार से बुधवार तक मतदान में कर्मचारियों की ड्यूटी के कारण एक सप्ताह का अवकाश घोषित किया गया है। मंडी इंस्पेक्टर व अन्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति में नीलाम नहीं हो सकती जबकि गरीब हम्माल मंडी पर भी पूरी तरह निर्भर हैं। लुनियापुरा निवासी हम्माल गोपीचंद का कहना है कि आज की स्थिति में हम्माल चाय पीने तक से मोहताज हो गया है। दीपावली के मौके पर मंडी में 6 का अवकाश हुआ और अब फिर एक सप्ताह का हो रहा है। ऐसे में जीवन यापन करना बडा ही मुश्किल हो रहा है। समर्थन खरीदी और कम आवक के चलते पहले ही मंडी बुरी स्तिथि में है। रोजाना 200 से 500 तक कमाई हो रही थी लेकिन अब वह भी नहीं मिलेंगे।
    अनाज और लहसुन-प्याज मंडी में लगभग 700 हम्माल और 50 से अधिक तुलावटी काम करते हैं। फ्रिगंज मंडी निवासी हम्माल दिनेश कुमार का कहना है कि पूरे साल में लगभग 150 दिन मंडी में काम होता है। तेज आवाक आने पर एक हम्माल 15 से 20 हजार रुपए महिना कमा लेता है। लेकिन बारिश में काम न होने के कारण हम्मालों को बहुत नुकसान होता है। हालात कुछ इस प्रकार है कि दूसरे लोगों से ब्याज से पैसे लेकर परिवार का निर्वहन करना पड़ता है।
    --- सीजन में मिला 12 दिन काम------
    हम्माल शैलेन्द्र राजपूत ने बताया कि खरीफ के पूरे सीजन में मात्र दो सप्ताह ही काम हुआ है। बाकि के दिन छुट्टीयों में निकल गए। काम हो ना हो लेकिन परिवार का खर्चा बराबर होतो है। समय पर बच्चों की फीस और अन्य खर्चों के लिए सेठों से ब्याज लेना पड़ता है। मंडी में हम्मालों के लाईसेंस होने के बाद भी कोई योजना का लाभ नहीं मिलता दुघर्टना के समय कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। कृषि उपज मंडी में कोई चिकित्सा व्यवस्था भी नहीं है।
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    - इस संबंध में जब कृषि उपज मंडी सीहोर सचिव करुणेश तिवारी से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि भोपाल से आदेश के चलते सभी कर्मचारियों की डयूटी चुनाव में लगाई गई है। नीलामी के लिए कम से कम 15 कर्मचारी आवश्यक हैं लेकिन अव्यवस्था से बचने के यह निर्णय लिया गया है। परिस्तिथियां ही ऐसी बन रही हैं हम कुछ भी नहीं कर सकते।

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