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निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रीय बौद्ध महासभा ने की नारेबाजी, जताया विरोध

reporter 2020-09-24 139
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  • kissaago
    • निजीकरण के विरोध जताते।

    सीहोर। मप्र के सीहोर जिला मुख्यालय पर गुरूवार को निजीकरण का विरोध देखने को मिला। जहां पर राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के कार्यकर्ताओं ने कढा विरोध जताते हुए नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

    राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के प्रदेश संयोजक कमलेश बोद्ध का कहना है कि देश में बड़ी तेजी से हो रहे निजीकरण से देश के लिए भारी संकट उत्पन्न होने की सम्भावना है । देश के विभिन्न भागों पर मु_ी भर पूंजी पतियों का अधिकार होने से भारत के प्रत्येक नागरिक की आर्थिक स्थिति पूंजी पतियों के नियंत्रण में पहुंच जायेगी । निजीकरण लोकतंंत्र के लिए बढ़ा खतरा है। नौजवान बेरोजगार युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निजीकरण को बन्द किया जाए ।
    राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के

    कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला संयोजक आकाश भैरवे के नेतृत्व में डिप्टी कलेक्टर प्रगति वर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।

    राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के प्रदेश संयोजक कमलेश बोद्ध ने ज्ञापन के माध्यम से कहा की 24 सितम्बर 1932 को पूना की यरवदा जेल में बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर व महात्मा गांधी के बीच हुए 10 वर्षों में आरक्षित वर्गो की सामाजिक,आर्थिक ,शैक्षिक व शैक्षिक व राजनैतिक स्तर पर समता,स्वतंत्रता व समाज में सामाजिक न्याय में व्याप्त गैर बराबरी भेदभाव को समाप्त किए जाने के समझौते को शून्य घोषित कर आरक्षित वर्गो के लिए कम्यूनल अवार्ड के अनुसार पृथक निर्वाचन दो वोट का अधिकार पृथक बसाहट को लागू किया जाना चाहिए। उन्होने कहा की वर्तमान राजनैतिक आरक्षण को समाप्त किया जाए जिससे आरक्षित वर्ग स्वतंत्र होकर अपना प्रतिनिधि राष्ट्र व आरक्षित वगों के हितों की रक्षा सुरक्षा हो सके ।

    जिला संयोजक श्री भैरवे ने कहा कि केन्द्र प्रान्तों के शासकीय विभागों में ओबीसी,एससी एसटी धार्मिक,अल्पसंख्यक व सामान्य वर्गो के आरणक्षों के अनुसार विशेष अभियान चलाकर तुरन्त भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ करने, निष्पक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतपत्र से मतदन की प्रक्रिया शुरू कराए जाने,बोटिंग मशीन से मतदान प्रक्रिया तत्काल बन्द की जाने,इवीएम मशीन को तत्काल प्रतिबंधित किया जाने, शिक्षा का राष्टीयकरण करते हुए पूरे देश में एकसमान शिक्षा एक समान पाठ्यकम एक देश एक शिक्षा का मूलभाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रहित में शिक्षा राष्टीयकरण किए जाने,प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमर्जी से चलाई जा रही मंहगी पुस्तकों के प्रचलन और मनचाही फीस वसूली पर तुरन्त पावन्दी लगाने सहित अन्य मांग राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के द्वारा

    राष्ट्रपति से की गई है। ज्ञापन देने वालों में कमलेश बौद्ध, नवीन भैरबे ,पवन सूर्यवंशी ,प्रशांत, के पी वर्मा, हरिओम बौद्ध ,नारायण सिंह जागरण ,लाड सिंह कटारिया, अरविंद मालवीय, देवेंद्र भारती ,श्यामलाल बरेला ,जनपद सदस्य मोहन केथ वाल, दयाराम कबीरपंथी ,कमल मालवीय ,कृष्ण डागर, रोहित हंसारी, शैलेंद्र तिवारी, राहुल कामले, हेमंत दोहरे, अशोक वर्मा ,विजेंद्र सूर्यवंशी, सचिन सूर्यवंशी शामिल रहे।
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