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दिव्यांग समझ परिजन मानते थे बोझ, आज परिवार का संबल बना विष्णु

reporter 2020-10-08 400
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  • kissaago
    • खेती का काम करता दिव्यांग विष्णु।

    सीहोर। एक हाथ नहीं होने बाद भी 22 वर्षीय विष्णु खेती-किसानी और मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहा है जो परिजन उसे बोझ मानते थे आज वहीं दिव्यांग बेटा इस गरीब आदिवासी गरीब का संबल बना गया है।
    इछावर के ग्राम दौलतपुर का रहने वाला दिव्यांग विष्णु आज एक नजीर बन गया है। उसने साबित कर दिखाया कि हौंसला और उत्साह हो तो शारीरिक विकलांगता भी आडे नहीं आती। जन्म से ही दाहिना हाथ नही होने के बावजूद विष्णू कभी किसी पर आश्रित नही रहा। हौंसले से दिव्यांग ने उम्र के साथ ही अपना संपूर्ण कामकाज एक हाथ से करने का अभ्यास किया।
    नतीजन विष्णु आज न सिर्फ अपना बल्कि परिवार के लोगों का भी भरणपोषण कर रहा है।

    जन्म के समय से ही विष्णु दिव्यांग है जिसको लेकर उसके परिजन दुखी रहते थे और उसे बोझ मानते थे। पिता मानसिंह का मानता था कि दिव्यांग बेटे को भरणपोषण के लिए जीवन भर अपने माता पिता पर ही आश्रित रहना पडेगा। लेकिन दिव्यांग विष्णु ने वह अपना प्रत्येक कार्य एक हाथ से ही करने का प्रयास करने लगा। नतीजन आज वह न सिर्फ घरेलू बल्कि मेहनत, मजदूरी सहित कृषि के सभी कार्य अपने एक हाथ अर्थात बाये हाथ से ही कर लेता है। आज वह परिवार का संबल बन गया है।

    भरण पोषण के लिए खेती के साथ करता है मजदूरी
    22 वर्षीय दिव्यांग विष्णु आदिवासी हिस्से में मिली करीब 3 एकड पुस्तेनी भूमि मे खेती करता है। इसके अलावा वह दूसरे किसानो के यहा कृषि कार्य करने के साथ ही मजदूरी भी करता है। हालांकि माता पिता भी उसका हाथ बटाते हैं। लेकिन खासबात यह है कि लोगो ने जिस दिव्यांग को परिवार पर बोझ

    माना था वही दिव्यांग आज न सिर्फ अपना बल्कि माता पिता सहित चार छोटे भाई बहन का भी भरण पोषण करता है। पिता मानसिंह ने बताया कि दो बडे बेटे सालो पहले ही पत्नियों के साथ अलग हो गए ऐसे में विष्णु ने ही जिम्मेदारी संभालते हुए खेती करना शुरु किया वह अपने एक हाथ से सभी काम बखूबी कर लेता हैं। उसकी बादौलत परिवार को दो वक्त की रोटी मिल पा रही है
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