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बीमा से वंचित किसानों ने घेरा कलेक्ट्रेट, की नारेबाजी, अफसरों के आश्वासन के बाद हटे

कृष्णा पांडेय की रिपोर्टreporter 2020-12-29 247
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    • प्रदर्शन करते किसान।

    सीहोर। एक और नए किसान कानून के खिलाफ बीते एक माह से दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलनरत हैं तो वही केंद्र और प्रदेश सरकार कानून के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कर फायदे गिना रहीं हैं।
    तमाम सरकारी वायदों के बीच किसान ठगी, धोखाधड़ी और सरकारी कारगुजारियों का शिकार हो रहा हैं। किसान योजनाओं से वंचित है।

    सहकारी सोसायटियों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हजारों किसानों से प्रीमियम राशि तो काट ली गई लेकिन साल बीत जाने के बाद भी प्रभावित फसलों के लिए बीमा नहीं दिया। जिसको लेकर वंचित किसानों ने कई बार ज्ञापन भी दिया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इससे आक्रोशित सैकडों किसानों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया। जिनका कहना था कि प्रीमियम की जांच की जाए और जल्द से जल्द उनके खातों में बीमा राशि डाली जाए। वहीं बिजली कंपनी की कार्रवाई के खिलाफ भी किसानों ने मांग रखी कि मार्च तक वसूली में राहत दी जाए। 

    मंगलवार को दर्जनों गांव के सैकड़ों किसान ट्रेक्टर-ट्रालियों और निजी वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे। लेकिन पुलिस प्रशासन ने किसानों गेट पर ही रोक दिया। इस दौरान आक्रोशित किसान पैदल ही कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। किसानों का कहना था कि हमारी मांगों से संबधित अधिकारी को बुलाकर समस्या का सब किसानों के सामने निराकरण किया जाए।

    इसके बाद जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक मुकेश श्रीवास्तव पहुंचे जिन्हें किसानों ने बताया कि हम 11 सोसाटियों  के 10 हजार से अधिक किसान हैं जिनकी प्रीमियम राशि तो काटी गई है लेकिन हमें बीमा नहीं मिला है। जिससे हम आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। साथ सोसायटियों में डिफाल्टर हो चुके हैं। कोई संतुष्ट जबाव देने का तैयार नहीं है कि बीमा राशि कब आएगी। बीमा कंपनी से बात कि तो उनका  कहना है कि सहकारिता बैंक की लापरवाही से यूटीआई नंबर दर्ज  नहीं किया गया है। इससे राशि नहीं मिली। 
    गुस्साए किसानों ने कहा कि हमें समय दीजिए कि कितने दिन में बीमा राशि मिलेगी नहीं तो 15 दिन बाद हम सडकों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जिसकी जिम्मेदारी  प्रशासन की होगी। किसानों की मांग सुनने के बाद जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि पूरे जिले में 36 हजार  किसान हैं जो बीमा राशि से वंचित हैं। इसको लेकर राज्यस्तर पर पत्राचार किया है। जल्द ही किसानों की मांग का निराकरण किया जाएगा। वहीं किसानों विद्युत के महाप्रबंधक श्री नरेडा से कहा कि फसल चौपट हो गई है बीमा राशि मिली नहीं है। किसान पैसा कहां से लाए। जबकि बिजली कंपनी के कर्मचारी टै्रक्टर, बाईक, मोटर और डोरी की जप्ती कर प्रकरण बना रहे हैं। हम  सभी किसान चाहते हैं कि मार्च तक हमें मोहलत दी जाए, जिसके बाद किसानों को आश्वासन दिया गया कि वसूली मार्चे तक रोक दी जाएगी साथ ही जिस पर गलत कार्रवाई हुई है। उसकी जांच करा कर निराकरण किया जाएगा। 

    36 हजार किसान बीमा से वंचित 
    जानकारी के अनुसार सहकारिता बैंक के 11 शाखाओं की सोसाटियों के तहत जिलेभर में 36 हजार किसान पिछले वर्ष की खरीफ  फसल बीमा राशि से वंचित हैं। बताया जा रहा है। बैंक कर्मचारियों ने किसानों के यूटीआर नंबर दर्ज नहीं किए हैं। जिसमें कर्मचारियों की गलती बताई जा रही है। साथ ही उन्हें निलंबित करने की बात कही जा रही है लेकिन किसानों का कहना है कि हम कर्मचारियों की गलती का खामियाजा क्यो भुगते। जब हमारे  खातों से प्रीमियम राशि काटी है तो खातों में ही बीमा राशि डाली जाए। 

    स्थाई कनेक्शन और ट्रांसफार्मर की जमा राशि का हिसाब दो
    आक्रोशित किसानों ने विद्युत कंपनी के महाप्रबंधक से कहा कि किसानों से ट्रांसफार्मर लगाने और स्थाई कनेक्शन देने पर करोडों रुपए जमा कराए गए हैं लेकिन अभी तक न तो ट्रांसफार्मर लगे हैं और ना ही स्थाई कनेक्शन मिले हैं उसका हिसाब कौन देगा। जबकि अपनी वसूली के लिए बेढंग से कार्रवाई की जा रही है। कनेक्शन काटने की जगह 3 एचपी से 8 एचपी कर दिया। 54 हजार का बिल जमा होने के बाद भी डोरी जप्त की जाती है। 50 हजार की वसूली के लिए टैक्टर जप्त कर लिया जाता है। इन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए। जिसके बाद महाप्रबंधन ने आवेदन लेकर किसानों को निराकरण का आश्वासन दिया।                                                                         .

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