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कहीं किसान विपक्ष की भूमिका की ओर अग्रसर तो नहीं...

जोरावर सिंह, वरिष्ठ पत्रकारreporter 2021-03-22 190
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    देश में इस समय कोरोना और किसान आन्दोलन चर्चाओं में है। कोरोना के मामले ठीक एक साल बाद फिर बढने से आम जन मानस में चिंता बढने लगी है, तो वही किसान आन्दोलन को भी चार महीने होने जा रहे है, किसान दिल्ली से लेकर बंगाल तक अपनी आवाज बुलंद कर रहे है तो वहीं सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ताओं का दौर भी बंद है, अब देश में यह सवाल भी उछलने लगा है,कि कहीं किसान विपक्ष की भूमिका की ओर अग्रसर तो नहीं है।
    गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के लिए तीन कृषि कानून लाये गए। इसका किसान संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है, केन्द्र सरकार और किसान संगठनों के वार्ताओं का भी 11 बार चल चुका है, पर कोई हल नहीं निकल सका है। आन्दोलन को लेकर किसानों की तैयारियां देखकर तो यही लगता है कि आन्दोलन जारी रह सकता है, जल्द समापन की अभी उम्मीद नहीं है।

    करीब चार महीनों से किसान आन्दोलन कर रहे है, दिल्ली की बार्डर पर धरना दे रहे । किसानों द्वारा ईटों की दीवारे बना कर रहने की व्यवस्था की है। किसान कारीगरों ने बांस के सहारे बेहद लुभावने फव्वारे बनाए हैं। उसमें असम और उत्तराखंड के बांसों का विशेष रूप से इस्तेमाल किया गया है। ये फव्वारे सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
    पंजाब हरियाणा से बंगाल तक
    किसान आन्दोलन पंजाब और हरियाणा से शुरू हुआ गणतंत्र दिवस पर लाखों किसानों ने ट्रेक्टरों के माध्यम से रैली निकाली और विरोध दर्ज कराया, किसान आन्दोलन में शामिल किसान आगे बढते गए और किसानों का एक धडा लाल किले तक जा पहुचा, इसके बाद किसान आन्दोलन सिमटता हुआ भी नजर आया, पर फिर किसान नेता राकेश टिकेत की आंखों छलक उठी और उनके आंसुओं के बाद फिर से किसान आन्दोलन आबाद हो गया। अब किसान नेताओं द्वारा धरना स्थल से लेकर देश के अन्य राज्यों में किसानों को संबोधित िकया जा रहा है।
    सोशल मीडिया और किसान
    जारी किसान आन्दोलन में किसान संगठनों और किसान नेताओं, किसानों से जुडे युवाओं, समाज सेवियों, वकीलों, अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा महत्वपूर्ण रोल अदा किया गया; मीडिया की नजर किसान आन्दोलन पर बनी रही, हां यह अलहदा विषय है कि मीडिया इस किसान आन्दोलन में किसान नेताओं के निशाने पर रही, पर सोशल मीडिया ने किसान आन्दोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अभी जारी है, सोशल मीडिया पर भी सवाल उठे पर सोशल मीडिया ने किसान आन्दोलन के सहारे अपनी स्थिति में सुधार किया, सोशल मीडिया पर कई किसान नेता उभरते हुए नजर आ रहे है।

    किसान आन्दोलन जब से शुरू हुआ तब से विपक्ष के नेता तो िकसानों का समर्थन कर ही रहे है, भाजपा नेताओं का िकसानों द्वारा लगातार किया जा रहा है काले झंडे भी दिखाए जा रहे है। पर किसानों को लेकर राज्यपाल श्री मलिक के वक्तव्य के कई मायने तलाशे जा रहे है, उन्होंने कहा है किसानों को खाली हाथ न भेजे, इससे यह बात तो तय हो गई है कि सत्ता पक्ष के नेताओं में भी उधेडबुन चल रही है। वहीं िकसान नेताओं की अन्य राज्यों होने वाली सभाओं ने सरकार की टेंशन बढा दी है।


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