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ड्रीम गर्ल और सोशल मीडिया की भीड़ में अकेलापन

reporter 2019-09-14 213
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  • kissaago

    - सोशल मीडिया के इस वर्चुअल युग में हजारों दोस्त होने के बाद भी व्यक्ति अकेला है और उसे एक सच्चे साथी, दोस्त व एक ऐसे कंधे की तलाश है जिस पर सिर रखकर वह दिल खोलकर अपनी बात बोल दे या दुखड़ा बांटते हुए रो ले। 13 सितंबर, शुक्रवार को रिलीज आयुष्मान खुराना अभिनित फ़िल्म ड्रीम गर्ल में डिजिटल और सोशल मीडिया के इस दौर व्यक्ति कैसे परिवार जैसी संस्था से दूर जाकर अकेलेपन का शिकार हो रहा है विषय को बड़े ही सरल हास्य, व्यंग्यात्मक तरीके से दर्शकों के सामने परोसा है।
    फ़िल्म ड्रीम गर्ल आपको हंसाएगी, गुदगुदाएगी और इसी हँसोड़ और व्यंग्य में समाज के लिए एक गहरा संदेश छोड़ती है। कि किस प्रकार आज सोशल मीडिया हमें हमारे परिवार से दूर कर रहा है। लेकिन गलती सोशल मीडिया की नही हम ही किसी जोम्बी की तरह अपने फ़ोन से चिपके हुए हैं और हमने परिवार और दोस्तों की अपेक्षा वर्चुअल संसार को तरज़ीह दी है।
    फ़िल्म ड्रीम गर्ल कहानी है मथुरा की। जहाँ कर्मवीर आयुष्मान खुराना एक बेरोजगार युवा हैं जो नोकरी की तलाश में भटक रहा है। जगजीत-अन्नू कपूर जो करम का पिता है, अंतिम क्रिया का सामान विक्रेता है जिसने अलग अलग बैंको से लोन लिया हुआ है जो विदुर है। अन्नू कपूर कमाल के अदाकारी की है।
    करम का एक खास गुण है कि वह लड़की की आवाज निकालने में माहिर है, बस इसी गुण कब कारण उसे फ्रेंड्शिप कॉल सेंटर में नोकरी मिलती हैं जहाँ वह पूजा एक लड़की की आवाज में लड़कों से सभी प्रकार की बातें करता है। पूजा के आशिकों की संख्या बढ़ती जाती है और करम की तरक्की। बीबी से परेसान एक पुलिस वाला जो शायरी भी करता है, देशी जस्टिस बीबर टोटो, नायिका का भाई महेंदर, एक मेग्जीन कि महिला संपादक जो मर्दों से नफरत करती है और नायक का अपना पिता अन्नू कपूर जो विदुर है पूजा से कॉल सेंटर वाली पूजा से बातें करते है और उससे प्यार करते हैं। साथ ही पूजा से शादी करना चाहते हैं। बृज और उर्दू भाषा का समिश्रण से बने संवाद आपके भीतर से हास्य पैदा करते हैं।
    इन सबके बीच में करम का अपना प्यार माही है। फ़िल्म में नुसरत भरुचा ने आयुष्मान की गर्ल फ्रेंड की भूमिका निभाई है।
    फ़िल्म में हास्य, मनोरंजक का जबरदस्त तड़का है। फ़िल्म राज शांडिल्य ने निर्देशित की है जिन्होंने स्क्रीप्ट और डायलॉग भी लिखे हैं।
    राज शांडिल्य कॉमेडी सर्कस लिख चुके हैं। फ़िल्म के संवादों में एक हास्य छुपा है। एक के बाद एक पंच हँस हँस कर अपना पेट पकड़ने को मजबूर हो जायँगे।
    आयुष्मान खुराना जिन्हें इस वर्ष फ़िल्म बधाई हो के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। जब वह लड़की पूजा बनकर लड़कों से बात करते है तो उनके हाव-भाव देखने लायक हैं, उनकी अदाकारी बेहद उम्दा है। उनकी हर फिल्म की कहानी दूसरी फिल्म से अलग होती है। अब उन्हें अलग-अलग तरह के किरदार निभाने में महारत हासिल हो गई है।
    विक्की डोनर, शुभ, मंगल सावधान, बरेली की बरफी, अंधाधुन, बधाई हो और आर्टिकल 15 के बाद ड्रीम गर्ल उनकी बेहतरीन अदाकारी से सजी फ़िल्म है, पैसा वसूल है फ़िल्म जिसे आप परिवार के साथ देख सकते हैं।
    ----- बाकलम क़िस्सागो ---
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