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परिवार और फर्ज के बीच सामंजस्य बनाता द फेमिली मेन

reporter 2019-09-25 168
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  • kissaago

    सेंसरशिप और छोटी-छोटी बातों में जब लोगों की भावनाएं जहाँ आहत हो, उस देश में रचनात्मक और बेहतर कंटेंट सिनेमा की चाह रखने वालों के लिए बेब सीरीज बेहतर विकल्प है। जहाँ न तो सेंसर की कैची का डर है और न ही धार्मिक और राजनीतिक विवाद का।
    सेक्रेड गेम्स और मिर्जापुर बेब सीरीज को लोगों ने हाथों हाथ लिया और खूब पसंद किया। इस बात से एक बात तो निश्चित है कि भारत में बेब सीरीज का भविष्य उज्जवल है। 16 अगस्त को प्रसारित सेक्रेड गेम्स 2 को भी लोगो ने खूब पसंद किया और सीरीज के किरदारों ने नाम युवाओं के मुंह से सुन सकते हैं। गणेश गायतोंडे, गुरुजी, बंटी के नाम के जोक्स और मीन्स सोशल मीडिया पर देश सकते हैं।
    सेक्रेड गेम्स और मिर्जापुर के बाद एक और धमाकेदार बेब सीरीज एक माह रिलीज हुई है।
    द फैमिली मेन, अमेज़न प्राइम वीडियो पर स्ट्रीमिंग हो रही है। सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर इस सीरीज में मनोज वाजपेयी जैसे मंझा हुआ अभिनेता मुख्य किरदार में है। दक्षिण भारतीय अभिनेत्री प्रियमणि, गुल पनाग, अबरार काजी, शारिब हाशमी, किशोर, दर्शन, नीरज माधव, करीम, दिलीप ताहिल जैसे कलाकार सह भूमिका में नजर आते हैं। अधिकांश कलाकारों को आप पहली बार देखते हैं। हिन्दी सिनेमा की तरह बड़े बजट या नामी सितारे को आप तलाश रहे हैं तो आपको निराशा हाथ लगेगी। परन्तु यदि बेहतर कंटेंट और रचनात्मक सिनेमा की तलाश में निकले हैं तो आपके लिए यह अच्छा विकल्प है। इंजीनियर, डॉक्टर और अन्य पेशों से जुड़े लोग भी अब इस सिनेमा की और रूख कर रहे हैं।
    द फ़ेमिली में श्रीकांत (मनोज वाजपेयी ) की कहानी है जो ATS के सीलिपर सेल टॉस्क में अंडर कवर ऑफिसर है। टॉस्क आतंकवाद को रोकने और उनसे लड़ने की लिए काम करती है। सीरीज का नायक श्रीकांत फर्ज और परिवार के बीच में सामंजस्य बिठाता एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति है।
    जो देश के लिए बड़े से बड़े मिशन जान पर खेल कर पूरे करता है लेकिन घर पर अपने बीबी और बच्चों की डांट तक का जवाब नही दे पाता। अचरज की बात नही एक मध्यमवर्गीय पिता के साथ अक्सर ऐसा होता है। जो महंगी कार और महंगा होटल वहन नही कर सकता।
    मनोज वाजपेयी कमाल के अभिनेता हैं, वह किरदार में घुस जाते हैं, नसीरुद्दीन शाह, ओमपुरी जैसे समानान्तर फ़िल्म कलाकारों की श्रेणी में आप इस कलाकार को रख सकते हैं।
    सीरीज वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। सीरीज में राष्ट्रवाद, मॉब लॉचिंग, इस्लामिक चरमपंथ, हिन्दू कट्टरवाद, आतंकवाद, जम्मू कश्मीर विद्रोह जैसी समस्याओं कही हास्य तो कही गंभीरता से उठाया गया है। सीरीज का नायक श्रीकांत, आतंकवाद से लड़ रहा है वह अपने देश से प्यार करता है लेकिन नकली राष्ट्रवाद का विरोधी है।
    एक सीन में मनोज वाजपेयी और गुल पनाग जो आर्मी ऑफिसर है, श्रीनगर के लाल चौक पर खड़े है।
    वाजपेयी कहते है मजे तुम लोगों के कर्फ्यू लगा है और हम रात को चाय पी रहे हैं।
    गुल पनाग बोलती है कि आसपा के दम पर हम कुछ भी कर सकते है। सरकारें, पाकिस्तान, हुर्रियत, अलगाववादी सब अपना अपना गेम खेल रहे हैं और पिसता कौन है कश्मीरी आवाम। यह संवाद कश्मीर की स्थिति की और आपन ध्यान खीचेंगी।
    सीरीज में 10 एपिसोड हैं जो सस्पेंस और थ्रील से भरपूर हैं साथ ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे भी सीरीज में बड़ी ही चतुराई से उठाए गए हैं। आखिरी एपिसोड में ऐसे खत्म नही नही किया है बल्कि एक रौचक मोड़ पर छोड़ दिया गया है। यानी कि सीजन 2 का इंतजार आपको करना पड़ेगा। मनोज वाजपेयी के साथ सभी के सभी का काम अच्छा है। वीकेंड पर समय निकाल कर आप देख लें। बोर नही होंगे।

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